मेरी बेटी मेरी पहचान है……..

बेजान शरीर में जान है ,

हर चहरे की मुस्कान है।

फूलो की हर कली के जैसे ,

उसकी हर मुस्कान है ।

आज मैं गर्व से कहता हूँ ,

मेरी बेटी मेरी पहचान है ।

साहस की कोई सीमा नहीं ,

ऊँचाई उसकी आसमान है।

बदल दे किस्मत का लिखा

उतनी उसकी उड़ान है ।

खुद के दम पर खड़ी हुई ,

छूने चली आसमान है ।

आज मैं उमंग से कहता हूं ,

मेरी बेटी मेरी पहचान है ।

दुःख के आँसू पोंछ ले मेरे ,

सुख का सवेरा दिखती है ।

कभी जो मैं हिम्मत हारू ,

एक उम्मीद बनके हाथ बढाती है ।

अब तो डर से भी नही डरता मैं ,

मुझे खुद की पहचान दिलाती है ।

आज मैं गर्व से कहता हूं ,

मेरी बेटी मेरी पहचान है ।



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