बेटियाँ…..

कितनी प्यारी होती है ,

हमारी प्यारी ये बेटियाँ ।

सुन्दर कोमल पैरों से ,

घर में घूमती करती छम छम ।

होंठो से प्यार की खुशियाँ छलकाती ,

हँसती रहती है ये हर दम ।

 

माँ की सहेली बन जाती हैं ,

हर काम में हाँथ बटाती है।

पिता के हर कामो में भी ,

कदम से कदम मिलाती जाती हैं ।

उजला सितारा बनके ये हमारे घर में आती है ,

पति के घर ये चाँद बनके चली जाती है ।

 

बांगो में कोई फूल सुनहरा ,

हजरों के बीच चमकता हैं ।

बेटी भी चाँद बनके ,

ससुराल को रौशन करती है ।

दिल में प्यार का दीप जला के ,

हरदम खुशिया फैलाती है ।

 

सास ससुर की होती है लाडली ,

पति के दिल की होती है रानी ।

छोटी सी गुड़िया होती थी ,

कब हो जाती है इतनी सयानी ।

मुश्किल घड़ी में हिम्मत दिखती ,

कभी ना बरसती आँखों से पानी ।

 

माँ बनके हर धर्म निभाती ,

अपने बच्चों को लिखती पढ़ाती ।

अच्छे बुरे हर वक़्त में उनके ,

साथ हमेशा चलते जाती ।

गलती करे तो प्यार से समझती ,

सही होने पर उनके लिए है लड़ जाती ।

 

कितनी सयानी होती है बेटियाँ ,

दो घर की जान होती है ।

दिल की हर ख्वाईश को भी बच्चों के ,

बिना बोले पूरा करती है।

माँ पापा से दूर होकर भी ,

अपनी पैरों पे खड़ी होती है ।

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *